नस्लवादी दुर्व्यवहार स्वीकार करने पर फीफा घटाएगा सजा, नई अनुशासन नीति जारी
फीफा ने विश्व कप के दौर की नई अनुशासनात्मक नीति के तहत नस्लवादी या भेदभावपूर्ण दुर्व्यवहार करने वाले खिलाड़ियों और अधिकारियों की सजा को आधा करने का निर्णय लिया है। इस नई व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य लोगों को अपनी गलती स्वीकार करने के लिए प्रोत्साहित करना है, साथ ही उन्हें जवाबदेह भी बनाए रखना है।
अपडेट की गई आचार संहिता के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति कम सजा का लाभ उठाता है, तो उसे अनिवार्य रूप से शैक्षिक कार्यक्रमों में भाग लेने की सहमति देनी होगी। फीफा का मानना है कि यह कदम दोषियों को स्व-रिपोर्टिंग के लिए प्रेरित करेगा, बिना सजा की गंभीरता को पूरी तरह से कम किए।
यह निर्णय इस बात को भी दर्शाता है कि खेल के दौरान नस्लवादी दुर्व्यवहार के मामलों को साबित करना कितना चुनौतीपूर्ण होता है, विशेषकर तब जब भाषा की बाधाएं सामने हों। इससे पहले भी फीफा उन मामलों में कार्रवाई करने में संघर्ष करता रहा है, जहां मैदान पर आरोप तो लगाए गए, लेकिन उनके ठोस सबूत नहीं मिल पाए।
पिछली गर्मियों में क्लब विश्व कप के दौरान ऐसा ही मामला सामने आया था, जब एंटोनियो रुडिगर ने पचुका के कप्तान गुस्तावो कैब्राल पर नस्लवादी दुर्व्यवहार का आरोप लगाया था। हालांकि, फीफा ने उस मामले में आगे कोई कार्रवाई नहीं की थी। कैब्राल ने नस्लवाद के आरोपों को सिरे से नकारते हुए कहा था कि उन्होंने रियल मैड्रिड के डिफेंडर को केवल “कायर” कहा था।
फीफा का यह नया नियम विश्व कप से पहले नस्लवाद के खिलाफ चलाए जा रहे उसके व्यापक अभियान का हिस्सा है। यह नियम अब सख्त अनुशासनात्मक उपायों के साथ-साथ औपचारिक रिपोर्टिंग, शिक्षा और जवाबदेही पर अधिक जोर देने की रणनीति के साथ लागू रहेगा।

